विनायक!
एक नन्हा-मुन्ना, प्यारासा नायक!
मुखड़ा
विनायक, विनायक, विनायक हूँ मैं,
नन्हासा प्यारासा नायक हूँ मैं!
प्रेम के दीप जलाने आया,
सबका दुलारा विनायक हूँ मैं!
विनायक, विनायक, विनायक हूँ मैं,
नन्हासा प्यारासा नायक हूँ मैं!
अंतरा १
अ, उ, म... अ, उ, म... ॐ!
सा रे ग म प ध नी सा...
ॐ की धुन और सरगम सुनता,
सबको हँसाता, सबका मन जीतता!
छोटी-सी दुनिया, खुशियों का संग,
मेरी हँसी में बजे मधुर तरंग!
विनायक, विनायक, विनायक हूँ मैं,
सबके दिल का धड़कन हूँ मैं!
अंतरा २
“इतनी-सी हँसी, इतनी-सी खुशी!”
मेरी अदाओं में दुनिया बसी!
मुझको जो देखें, हँसकर कहें,
चाँद का टुकड़ा गोद में रहे!
नन्हे-नन्हे हाथ, नन्हे-नन्हे पाँव,
मेरी मुस्कान से महके हर गाँव!
विनायक, विनायक, विनायक हूँ मैं,
सबकी आँखों का तारा हूँ मैं!
अंतरा ३
एक सौ सातवें दिन मैंने,
कर दिखाया कमाल!
पीठ से पेट पर पलटी मारी,
मचा घर में धमाल!
दादा , दादी खुशी से झूमे,
चेहरे पर मुस्कान!
मेरी पहली पलटी ने जीता,
सबका दिल और जान!
विनायक, विनायक, विनायक हूँ मैं,
नन्हा-सा करतबी कलाकार हूँ मैं!
अंतरा ४
मम्मी-डैडी को बुलाकर दादी,
बोलीं हँसते-हँसते—
“चल झमूरे, पलटी मारकर,
दिखा ज़रा फिर से!”
मैंने सोचा, वाह रे दुनिया!
क्या है ये चक्कर भारी?
एक बार जो करतब दिखाया,
फिर से माँगें बारी-बारी!
विनायक, विनायक, विनायक हूँ मैं,
सबकी मर्ज़ी संभालता हूँ मैं!
अंतरा ५
दादा मुझको टेरेस पर ले जाते,
झाड़ी, गाड़ी, पहाड़ दिखाते!
देख-देखकर वही नज़ारे,
अब तो मन में उठें विचार निराले!
झाड़ी देखी, गाड़ी देखी,
डोंगर भी कई बार!
दादा, अब कुछ नया दिखाओ,
कब तक यही संसार?
विनायक, विनायक, विनायक हूँ मैं,
नई दुनिया का खोजी हूँ मैं!
अंतरा ६
वीडियो कॉल लगाकर सब,
मुझको दिखलाते हैं!
खुद तो मुझको देखते रहते,
मुझको कहाँ दिखाते हैं!
फोन को अपनी ओर घुमाओ,
चेहरा भी तो दिखाओ!
रुको ज़रा, मैं बड़ा तो हो लूँ,
फोन चलाना सिखलाऊँ!
विनायक, विनायक, विनायक हूँ मैं,
टेक्नोलॉजी का ज्ञानी हूँ मैं!
अंतरा ७
दूसरे ही महीने पासपोर्ट बना,
पाँचवें महीने वीज़ा मिला!
मेरी विदेश यात्रा का सुनकर,
हर चेहरे पर फूल खिला!
बेल बजी, पोस्टमैन ने पूछा,
“विनायक सर घर में हैं?”
मैंने सोचा, वाह भाई वाह!
मेरे भी अब चर्चे हैं!
विनायक, विनायक, विनायक हूँ मैं,
नन्हासा इंटरनेशनल ट्रॅव्हलर हूँ मैं!
अंतरा ८
बेडरूम, हॉल और टेरेस देखा,
बाणेर-मुंढवा भी देख लिया!
पुणेकी दुनिया घूम घूमकर,
मैंने थोडा बहुत जान लिया!
ना जाणे क्यू दुबई-दुबई रोज़ सुनूँ मैं,
मन में उठे सवाल!
जापान की सैर करूँ अब,
क्या कहते हो मम्मी डॅडी के लाल?
विनायक, विनायक, विनायक हूँ मैं,
दुनिया घूमने को तैयार हूँ मैं!
समापन
नन्हे कदम और अ,ह की
बातें,
खुशियों की सौगात!
मेरी हँसी से रोशन होती,
सबकी दिन और रात!
दादा - दादी , मम्मी-डैडी,
सबका प्यार समाया!
प्रेम, खुशी और मीठी शरारत,
लेकर विनायक आया!
विनायक, विनायक, विनायक हूँ मैं,
नायक हूँ मैं, गायक हूँ मैं!
प्रेम का दीप जलाने आया,
सबका प्यारा विनायक हूँ मैं!
विनायक, विनायक, विनायक हूँ मैं,
सबके दिल में बसने आया हूँ मैं!
योगीराज देवकर
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